Posts

Bewafa (बेवफ़ा)

Image
दिल के ज़ख्म और यादें: बेवफ़ा (Bewafa) शायरी दर्द-ए-दिल की आवाज़ वो जो कहते थे कभी साथ न छोड़ेंगे, आज वही ज़िंदगी में बनकर आए बेवफ़ा (बेवफ़ा) । वादाखिलाफी उनकी वफाओं का दावा कुछ और था, हकीकत में तो निकले वो बेवफ़ा (बेवफ़ा) और। अधूरी कहानी हर कहानी का एक अंत होता है, पर मेरी कहानी का अंत एक बेवफ़ा (बेवफ़ा) निकली। दिल की टूटन टूट गए हैं सपने, बिखर गए हैं अरमान, जब से मिला है मुझे एक बेवफ़ा (बेवफ़ा) इंसान। अकेलापन अकेले ही काटनी है अब ये ज़िंदगी, क्योंकि छोड़कर चली गई एक बेवफ़ा (बेवफ़ा) साथी। ...

Bewafai (बेवफ़ाई)

Image
बेवफ़ाई (Bewafai) पर दिल छू लेने वाली शायरी शायरी 1 तेरी यादों में खोकर, हम अक्सर खो जाते हैं, कैसी थी ये बेवफ़ाई (बेवफ़ाई) , जो तुम दे गए थे। शायरी 2 इश्क़ में मिली चोट गहरी है इतनी, दिल भूला न पाया तेरी बेवफ़ाई (बेवफ़ाई) की कहानी। शायरी 3 हर मोड़ पर धोखे दिए, हर कदम पर रुलाया, तुम्हारी बेवफ़ाई (बेवफ़ाई) ने हमें जीना सिखाया। शायरी 4 जो तुमने किया, वो कोई वफ़ा न थी, बस थी तुम्हारी बेवफ़ाई (बेवफ़ाई) , जिसकी कोई दवा न थी। शायरी 5 रिश्तों की डोर तुमने ऐसे तोड़ी, कि हर जगह दिखी तुम्हारी बेवफ़ाई (बेवफ़ाई) की निशानी। ...

Shikayat (शिकायत)

Image
शिकायत (Shikayat) – दिल की आवाज़, रूह की पुकार #1 अधूरी बातें कुछ अनकही बातों की शिकायत है तुझसे, क्यों खामोश रहा, जब दिल को तेरी ज़रूरत थी सबसे। #2 बदलते रिश्ते रिश्तों की बदलती रंगत पर एक शिकायत है हमें, क्यों हर रिश्ता वफ़ा की कसौटी पर खरा उतरता नहीं। #3 वफ़ा की कमी तेरी वफ़ा में कमी थी या मेरी चाहत में कुछ, यही है दिल की सबसे बड़ी शिकायत हर सुबह और शाम। #4 वक्त की मेहरबानी वक्त से कोई शिकायत नहीं मुझे, बस ज़रा सी मेहरबानी हो, कि कुछ और पल ठहर जाए। ...

Gila (गिला)

Image
गिला (Gila): शिकायतें, एहसास और दर्द शिकायत-ए-दिल कुछ ऐसा हुआ कि हमें उनसे अब कोई गिला नहीं रहा, वो बदल गए तो क्या हुआ, हमारा प्यार तो मरा नहीं रहा। बेवफाई का गिला आज भी है हमें तुमसे वही पुराना गिला , तुमने वादे किए थे बहुत, पर निभाना भूल गए। तकदीर से गिला क्यों मेरी तकदीर में सिर्फ तन्हाई है, ये कैसा गिला ? हर खुशी को मैंने छूकर भी, खो दिया हर शिला। वक़्त का गिला वक़्त का ये कैसा मोड़ है, मेरा तुमसे गिला नहीं, पर जो साथ चलना था हमें, वो पल अब मिलता नहीं। ख़ामोशी का गिला लबों पे है ख़ामोशी, मगर दिल में है एक गिला , तुमने समझा न...

Shikwa (शिकवा)

Image
शिकवा (Shikwa) - दिल की आवाज़ और ख़ामोश गुज़ारिशें मुझे तुमसे कोई शिकवा नहीं, बस इतना है, तुमने क्यों बदल दी अपनी राहें यूँ ही तन्हा। लबों पर शिकवा लिए फिरता हूँ मैं, कि दिल को राहत क्यों नहीं मिलती तुझ बिन। हर बात पर शिकवा करना क्या ठीक है, कभी अपनी गलतियाँ भी तो देख, ऐ दोस्त! उनकी बेरुखी से शिकवा क्या करें हम, हम ही थे जो बेखबर उनकी अदाओं से। रात भर जागकर चाँद से शिकवा किया, क्यों मेरी तन्हाई का साथी तू भी नहीं रहा। मेरे हर शिकवा का जवाब तुम हो, पर तुमसे ही शिकवा कैसे करूँ मैं? ...

Majboori (मजबूरी)

Image
मजबूरी (Majboori) पर दिल छू लेने वाली शायरी Shayari 1 हम भी चाहें कि उड़ें आसमानों में, मगर पाँव में ज़ंजीर है, नाम जिसकी मजबूरी है। Shayari 2 इश्क़ में क्या क्या न करना पड़ा हमें, कुछ ख़्वाहिशात थीं, कुछ मजबूरी थी। Shayari 3 वो रूठ गए हमसे, शायद उनकी भी कोई छुपी हुई मजबूरी रही होगी। Shayari 4 लफ्ज़ जुबां पे आते नहीं, आंखें सब कह जाती हैं, क्या करें, ये ख़ामोशी भी एक मजबूरी बन जाती है। Shayari 5 हर रिश्ते की अपनी एक दास्तान होती है, कभी प्यार, कभी दोस्ती, कभी मजबूरी होती है। Shayari 6 दिल में दर्द, आँखों में नमी, और होठों पे हँसी, ये कैसी मजबूरी है जो जी रहे हैं हम खुशी-खुशी। ...

Bebasi (बेबसी)

Image
बेबसी (Bebasi) पर दिल छू लेने वाली शायरी शायरी 1 जब लबों पर हंसी हो, पर दिल में हो दर्द गहरा, ऐसी हर रात कटती है, ये कैसी बेबसी का पहरा। शायरी 2 कहने को बहुत कुछ है, पर अल्फाज़ नहीं मिलते, लफ़्ज़ों की इस बेबसी में, हम खुद से भी नहीं मिलते। शायरी 3 मंज़िल करीब थी, पर रास्ता भटक गए, क़दमों की बेबसी देखो, हम यहीं अटक गए। शायरी 4 आंखों में नमी है, होठों पर खामोशी है, कैसी ये बेबसी है, हर साँस में उदासी है। शायरी 5 तकदीर से शिकायत क्या करें, जब खुद ही मजबूर हों, यह कैसी बेबसी है, हम अपने ही नूर से दूर हों। ...